Monday, October 7, 2019

ये वो रावण है जो मरता नहीं है

देश में रावण जलाने की तैयारियां हो चुकी है। बस अब कुछ घण्टों का इंतजार और फिर रावण को निशाने पर लेकर उसका अंत कर दिया जाएगा। अब कहीं किसी मैदान में ही लम्बे चौड़े रावण के पुतले को तैयार किया गया है तो कहीं बाजार में कारीगर रावण रूपी पुतले को उसके अंत के लिए सजा चुके हैं।बाजारों में रावण की खरीद भी है।

आज कई जगह देखने में आया कि लोग अपनी गाड़ियों पर पुतलेनुमा रावण को बांध कर ले जा रहे हैं, वो अपने नजदीकी मैदान में उस पुतले को खड़ा करेंगे और फिर मंगलवार की शाम उसे फूंक दिया जाएगा। यानि लोग पूरी तरह से तैयार हैं रावण का अंत करने के लिए या कहें कि एक भी पुतले को छोड़ा नहीं जाएगा, उसे बक्शा नहीं जाएगा। जब तक कि उसके पुतले से पटाखों की गूंज बंद नहीं होगी।
चलिए अब आता हूं मूल मुद्दे पर, जिसकी वजह से ये भूमिका तैयार की गई और ये भूमिका इसलिए तैयार की गई कि आपको ये आसानी से समझ आ सके कि इस पुतलेरूपी रावण को जिस तरह से आप और हम आखिर तक नहीं बख्शते, उसी तरह हमारे समाज के रावण को भी बख्शना बंद कर दिया जाए तो शायद समाज की तस्वीर कुछ ठीक हो जाए।
ये पुतलारूपी रावण तो कुछ पलों में ढेर हो जाएगा लेकिन हमारे समाज में जो रावण खुलेआम घूम रहे हैं उनका क्या किया जाए? क्योंकि जिन लोगों को ऐसे रावण से निपटाने की जिम्मेदारी हमारी सरकार ने दी है वो तो सो रहे हैं। अब जिम्मेदारी ये भी है कि एक तरफ समाज में घूम रहे रावण और दूसरी तरफ आपके और हमारे दिमाग में घूमने वाले रावण रूपी विचार का अंत कैसे किया जाए।
देश में लगातार बढ रही आपराधिक वारदातें जहां चंद रूपयों के लालच में कभी किसी का कत्ल कर दिया जाता है तो किसी अगुवा कर लिया जाता है, किसी को मारने की धमकी दे दी जाती है तो कोई ब्लैकमेलिंग का शिकार होता है। इन्हें अंजाम देने वाले होते हैं हमारे ही समाज में बसने वाले वो रावण जिन्हें कहा जाता है आपराधिक मानसिकता वाले लोग बस अब तैयारी यही करनी है कि इस तरह के लोगों को भी किसी एक दिन ही नहीं बल्कि रोज सजा दी जाए।ताकि समाज में इस तरह के रावण की फौज ना बढ़े।
दशहरे पर हम जिस रावण को जलाते हैं उसकी तो कुछ जगह पूजा भी की जाती है और उसे प्रखाण्ड पंडित भी माना जाता है और वो बात प्राचीनकाल से जुड़ी है लेकिन अगर हमें अपना वर्तमान और भविष्य सुधारना है तो आपराधिक सोच रखने वालों को तो रोकना ही होगा। 

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